आज फिर कुछ पंक्तियां याद आ गईं…

बदलता बहुत कुछ

बदल जाता है वक़्त
मौसम
प्यार
और ऐतबार भी

बदल जाती है भावना
चाहत
नफ़रत
जीत और हार भी

बदल जाते हैं दिन
अपने
सपने
और दोस्त – यार भी

औरों की क्या बात करें
अंधेरे में तो बदल जाता है
खुद का साया भी।

पूनम सिंह

शिव सेना के ताज़ा हालात पर मुझे मेरी लिखी कुछ पंक्तियां याद आ रहीं हैं…

वक़्त

वक़्त भी है क्या हसीन धोखा
राजा हो या रंक
इसने किसको छोड़ा?

फ़िसल जाता है कभी
हाथों से रेत सा
बह जाता है कभी
अंजुलि से नीर सा
बांध ही नहीं पाते कभी
बहता पवन सा
लौट कर नहीं आता कभी
सुखद लम्हे सा
बीत कर नहीं देता कभी
बुरे सपने सा

दौड़ता है सरपट कभी
थमता ही नहीं
ठहर जाता है कभी
कटता ही नहीं
आगे बढ़ने ही देता नहीं
हार जाते होंसला
तूफान बन कर कभी
दे जाता गहरा सदमा

वक़्त की डोर हाथों में
कौन पकड़ पाया?
वक़्त का फेर ऐसा
कौन समझ पाया?

पूनम सिंह

 
आओ चलो

आओ फूलों की मुस्कान बनें
कब तक काटों से उलझेंगे।

चलो इंद्रधनुषी रंग बिखेंरे
कब तक धटाओं में छिपेंगे।

आओ नदी की रवानगी बनें
कब तक किनारों से टकरायें।

चलो आसमां की उड़ान लें
कब तक ज़मीं की धूल रहेंगे।

आओ समंदर की गहराई नापें
कब तक लहरों से खेलेंगे।

चलो पतंग की परवान बनें
कब तक मांझे से जुड़ेंगे।

आओ धडकनों में समायें
कब तक दिमाग में रहेंगे।

चलो आँखों का काजल बनें
कब तक रात की स्याही रहेंगे।

आओ सुबह की लाली बनें
कब तक ढलती शाम सजाएं।

चलो एक उम्र संवारे
कब तक लम्हों को चुराएं।

आओ एक कहानी लिखें
कब तक किस्सों में जिएंगे।।

पूनम सिंह
🌺🌷🌹🙏🙏🙏

 

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Ode To A Saree

O beautiful ! O desirable one !
Wrap me up and lend me your affection.

Silk, jute, georgette, linen,
Crepe, Chinon, chiffon or cotton…
On the skin, your magical touch
Induces feelings abundant.
Colour, tone, feel and texture
Impart you a distinct character.

Jewels, pearls, stones, bindis, bangles…
Forever remain your embellishments.
Innumerable patterns and designs,
Bestow you a rich heritage and shine.
Weaves, prints, embroidery, Kaari…
Artisans work upon you a story.
Canvas you offer is ever-widening,
For the artist to brush a dream.

O magnificent ! O splendorous one !
Full of grandeur ! A six-yard wonder !
Each one of you in the wardrobe,
Is in itself a narrative to be told.
At times, you propose,
To wipe the sweat off the brows,
Or wet hands of my li’l ones.

Softly fondled in your folds,
Many a time, you have enveloped,
Sleeping children in their mothers’ cuddle.
Often lovers have caressed the ones,
Whom you engulf with passion.
Feminity enjoys your protection,
Or veil the body’s imperfections.
And the chosen one who you drape,
Enhances her beauty and grace.

O beauteous ! O marvellous one !
Touch me and shower your love !
Indian women of all shapes and age,
Can’t get over your charm and rage.
May God keep growing their tribe,
Spreading your popularity far and wide.

Poonam Singh

अनजानी मंज़िल

एक शाम बैठा जब आंगन में तन्हा
हवा के झोंके ने छूकर पूछा
दर्द है क्या, ये बता
बहता नहीं क्यूं मुझसा ?

भंवरा भी गुनगुन करता गुज़रा
चुपके से बोला
प्यास है कैसी, ये बता
करता नहीं क्यूं पान मधु का?

डाली से एक पत्ता सूखा
गोद में आकर गिरा
टसक है कैसी, ये बता
किसी के नहीं क्यूं प्यार में गिरता?

बादलों ने दी दस्तक आसमान से
सोच रहा क्या बैठा?
चिंता है कैसी, ये बता
बनकर घटा नहीं क्यूं बरसता?

करूं क्या इनसे बयां हाल
सता रहा मुझे गम क्या?
तड़प है कैसी, बताऊं क्या
नहीं है कुछ पता।

कहां से आया, जाना कहां
कठिन डगर है, मंज़िल कहां?
चल पड़ा हूं किस ओर
नहीं है कुछ पता ।

तुझसे मिलने की चाह में
चुन लिया है जो रास्ता
सही है कितना, कितना गलत
नहीं है कुछ पता ।

पूनम सिंह

Today is lunar eclipse generating a lot of interest in kiddos…Moon has always evoked beauty, wonder, fascination, curiosity, magic,loneliness…amongst the mankind… cutting across generations and centuries. I have also been fascinated by it and as a child used to wonder about its waning and waxing  & would always be curious to know how to reach there…

once while taking a stroll in the garden on a full Moon night, got inspired enough to pen down the following lines…

अकेला चाँद

आसमान में कल पूनम का चाँद जो देखा

दूर खड़े लगा कितना तन्हा

सदियों- दर-सदियों चमक रहा तू अकेला

प्रेरणा दी है कितनों को, तुझे नहीं अंदेशा

कभी किसी चकोर की बना तू आस

कभी किसी प्रेयसी के मधुर कपोल

कभी नानी की लोरियों में बना तू मामा

कभी एक माँ का प्यारा सा नन्हा

कभी किसी शायर का हसीना सपना

कभी किसी कवि की कोई संवेदना

कभी हताश प्रेमी ने ढूँढा तुझमें साथी अपना

कभी किसी वैज्ञानिक की झकझोरी चेतना

आने वाली पीढ़ियाँ भी ढूँढेंगी तुझमें कुछ नया

पर चाहता है तू क्या, हमें नहीं चलेगा पता

सदियों- दर- सदियों चमकेगा यूँ ही तू अकेला

जब तक ख़त्म न होगा इस दुनिया का मेला।

 पूनम सिंह
🌛🌜🌙🌝⭐🌟

माँ

माँ तू है
तो मेरा बचपन है
पींग है, पतंग है
सपने हैं, उड़ान हैं
शिकवे हैं, शिकायतें  हैं
हठ हैं और मिन्नते हैं ।

माँ तू है
तो मेरा पीहर है
ननिहाल है, लोरी है
चंदा – मामा की कहानी हैं
तीज है, त्योहार हैं
सरगी है और कोथली है।

माँ तू है
तो मेरा मान है
अधिकार है,  सम्मान है
परिहास है,  आस है
होली है,  ठिठोली है
इंद्रधनुष है, दिवाली है ।

और हर दिन Mother’s Day है

NaMo Leela….my latest article published in a newspaper from Chd

NaMo Leela
If people look at the decimation of the opposition in recent Lok Sabha results in disbelief then it is their fault. Clearly, they failed to see the writing on the wall. In the last five years, there has been only one man dominating the entire media. Be it his foreign sojourns, various schemes, rallies, Mann ki Baat, pilgrimages that he regularly keeps undertaking, celebrating festivals with the soldiers, we haven’t missed even a single event of NaMo.
Can you name any other leader from previous years who could enter the people’s psyche like him? It is the pure magic of his words and personality that has made them dance to his tunes. He asked them to give up LPG subsidy and they considered it as a cool chance to bask in the sacrificial surge. Demonetization was embraced as his surgical strike on black money.  People also accepted GST as a strike on hidden taxes. What if they were caught unawares, even his cabinet is never aware of his next move. Who is bothered about falling rupee, rising prices of petrol, diesel, LPG?  Why should they fret over Judiciary, CBI, EC, RBI, Airlines, BSNL,money-laundering? NaMo ‘hain na’. The only worry is the neighbouring rogue state and he has been able to tame it in his quintessential grand style.
NaMo wants us to acknowledge every occasion in a splendid way. For the first time, we celebrated Elections like a festival. Exams, results, Navratraas, Ramzaan, surgical strikes, Abhinandan’s release, so many things were happening simultaneously. Our focus was bang on the high sky. Who had the time to look down and ponder over mundane things like development? Modi Ji is there, all is well.
Leader of an opposition party tried to build a narrative around ‘chowkidaar chor hai’. In his rallies, suddenly he would start shouting ‘chowkidaar’ and the crowd would go berserk and rejoice in unison ‘chor hai.’  Distanced from our mythological realities, he forgot that he is actually helping NaMo. The biggest, the fondest and most lovable ‘chor’ for us has always been our own ‘maakhan chor’-Krishna.  People immediately started equating NaMo with Him. In the present avatar, he played his Leela so deftly that when he was pulling the carpet from under their feet, opposition parties failed to notice the trick. Yes, he is a ‘chor’ who has stolen their votes, vote-share, vote-percentage, vote-bank, issues, in fact, their entire narrative.
Going by the adage:  “There is always a woman behind the success of a man,” Modi, like Krishna, has the power of millions of women behind him who came forward to vote for him in huge numbers. Be it his Ujjawala Yojna, Jan Dhan Yojna, Household Toilet Scheme or Triple Talaq Ban, women have been the biggest beneficiaries. Moreover, keeping them engaged through entertainment, one more channel got added to their kitty, available free of charge. They had seen their husbands in boring greys, blues, whites and blacks and here was NaMo giving them fashion goals and adding colours to their imagination. Why would women not vote for him?
Who would get carried away by the talk of alleviating poverty these days? Our PM himself is a poor man. The opposition will have to brainstorm in a big way to understand this man who is miles ahead of them in his conduct, thinking and actions.

Poonam Singh

फागुन में फाग

फागुन में फाग

होली का त्यौहार
रंगों की बहार
गोपियों का मनुहार
पिचकारी की फुहार

गोरी की कलाई
सखियों की दुहाई
गुजिया की मिठाई
पेड़ो पर तरुणाई

सतरंगी सी रंगोली
प्रीत भरी बोली
राधा-श्याम की ठिठोली
संग  मेरे  हमजोली

छोरों का साँग
पकौडों में भांग
ठंडाई का गिलास
चहुँ ओर उल्लास

जीवन में रंग
मन जल-तरंग
साजन का संग
महका अंग-अंग

बसंत में बाग
हवाओं में राग
फूलों में पराग
फाल्गुन में फाग

पूनम सिंह

मैं कश्मीर हूँ

मैं कश्मीर हूँ

मैं कश्मीर हूँ
सब कहते हैं
हिंदुस्तान का ताज हूँ

ताज यह
न जाने
कितनी बार उजड़ा
कितनी बार बसा
इतने सालों में भी
थमा नहीं
उजड़ने- बसने का सिलसिला

कभी उजड़ा
इंसान के हाथों
बहा खून
न जाने
कितने मासूमों का
कभी लुट गया
परदेसियों के हाथों
कभी अपने ही
सरफिरों के हाथों

उजड़ गया कभी
प्रकृति के हाथों
प्रलयंकारी बाढ़ में
बह गए कभी
भूकंप में
ढह गए कभी
मेरे सारे सपने
और अपने

क्या कसूर था मेरा
बिछुड़ गए
खदेड़े गए
कितने मेरे अपने
मैं देखता रहा
एक पत्थर सा
जड़वत
लुटा मैं
सजा भी मिली
मुझे ही

न जाने
कितने और
देने होंगे इम्तिहान
मुझ ज़मीनी जन्नत को
उजड़ने-बसने के सिलसिले से
पाना चाहता हूँ निजात
चाहता हूँ रचना
एक नया इतिहास ।

पूनम सिंह