लॉकडाउन

लॉकडाउन

लॉकडाउन हुआ आपका
तो लगे घबराने, तिलमिलाने
और फड़फड़ाने

क्यूं, सोचा है कभी
बैठे हो कब से तुम
लॉकडाउन कर
आंगन में चहकते
पंछियों का
बागों में खिलती
कलियों का
मधु चुराते भवरों का
भीनी सी भावनाओं का
रेशमी एहसासों का
अपनों के अपनत्व का
और
खुद से खुद का

अब मिला है मौका
तो चलो
इन इक्कीस दिनों में
वक़्त की सांकल पर लगे
खोल सारे ताले
जुड़ें फिर एक बार
अपनों के दिलों में झंकृत होते
स्नेह के स्वरों से
ज़िन्दगी के सफ़र में पीछे छूटे
बचपन के स्वाद, शैतानियों
और नादानियों से
पंख फैला गगन चूमती
प्रकृति की उड़ान से
बरसात के पानी में तैरती
काग़ज़ की नाव से
आपाधापी में गुम हुई
संवेदनाओं से
बोझ के सागर तले दबी
अभिव्यक्ति की गहराइयों से

जुड़ें फिर एक बार
भोर की लाली से
दुपहरी के यौवन से
शाम की परछाई से
रात की स्याही से
उम्मीदों के ढेर से ताकती
हक़ीक़त से
कल्पनाओं के झाड़ पर बैठी
सत्यता से
कसक से कराहती
काया से
आइने से झांकते
इस शक्स से
बहुत कुछ कहना चाहते
अपने अक्स से

पूनम सिंह

हमसफ़र

Because love is in the air…♥️♥️just thought of sharing my poem…हमसफर…💞💞 with you all🌹🌹🌹

हमसफ़र

ये कौन है जो मुझे छू कर निकल गया

सिहरन एक प्यारी सी मुझमें भर गया

बरखा की पहली फुहार से नहला गया

भीनी-भीनी बयार से सहला गया

सुबह की लाली जैसे बिखरा गया

सपनों की दुनिया में पहुँचा गया

प्यार का एक सैलाब मुझमें भर गया

लहरों को जैसे साहिल ही दे गया

यादों के भंवर में ऐसे डुबा गया

वक्त को जैसे ठहरा ही गया

मिल जाए एक बार तो दीदार करूँ उसका

रेगिस्तान में जो घटा बन कर बरस गया

पूनम सिंह

A Lot Can Happen Over Coffee

I fondly recall the spring of 2007 when we were posted in Delhi. Coffee, then, as a theme was quite popular for the Ladies Meet. I was given decoration responsibilities of one such get-together. When I shared it with my better half, as usual, with an elusive tone he pronounced, ” Don’t worry, there is a CCD outlet just behind Maurya and I know somebody there who can help out.”
I just jumped on hearing this but then the meagre budget of the party, momentarily, dampened the spirit. After all, had never heard of a big brand going out of its way to help people without burning a hole in their pockets.

Next couple of days were spent in planning the nitty-gritty of the bash. One evening, on returning home, to my utter surprise, I found the drawing-room full of paraphernalia from CCD. There were posters, coffee mugs, plates, glasses, cookies, choco-chips, packets of coffee beans, coffee machine and other miscellaneous items from the nearest outlet, and that too without any charges. What else I needed? CCD was even ready to send one of their employees to handle their machine, but I humbly turned down.

Decoration of the venue now seemed a left-hand job. But I am not the one to stop at that. The ‘keeda’ in the brain was itching to do some more acrobatics. I had a fair idea of Tea Leaves Reading and Coffee Cup Reading – called Tesseomancy or Tasseography- popular forms of predicting future in Turkey but taking baby steps in India then. I thought of reading coffee cup for the guest, and hence searched more about it and also tried practising at home. It is actually done with brewed coffee prepared with a special method so that it leaves coffee grounds sitting at the bottom of the cup after coffee has been consumed. Symbols appearing in the residue are regarded as messages for the future. By the way, those who dislike tea or coffee shouldn’t get disheartened. Fortune-telling by Wine sediments is also done.

Anyhow, on the D day, maybe because of different quality of coffee beans, cup after cup, figures just refused to appear. Looking no less than a fortune-teller with candles burning around, smoke emanating from incense sticks and coffee aroma in the air, I was literally sweating. Just then I spotted a packet nicely perched on the corner shelf as part of the decor. Here was my last chance. Next moment, to my utmost relief, a number of figures, clear and beautiful, appeared at the bottom. CCD beans had done their magic.

It is the quality of a product that speaks for itself and if you add a humane touch, no one can stop it from achieving success as CCD has done. Mindful of the tragic times it had to go through recently, I want to say a big thanks to CCD for being there when I needed it the most. You are the best. Keep brewing and keep growing!

Poonam Singh

आज फिर कुछ पंक्तियां याद आ गईं…

बदलता बहुत कुछ

बदल जाता है वक़्त
मौसम
प्यार
और ऐतबार भी

बदल जाती है भावना
चाहत
नफ़रत
जीत और हार भी

बदल जाते हैं दिन
अपने
सपने
और दोस्त – यार भी

औरों की क्या बात करें
अंधेरे में तो बदल जाता है
खुद का साया भी।

पूनम सिंह

शिव सेना के ताज़ा हालात पर मुझे मेरी लिखी कुछ पंक्तियां याद आ रहीं हैं…

वक़्त

वक़्त भी है क्या हसीन धोखा
राजा हो या रंक
इसने किसको छोड़ा?

फ़िसल जाता है कभी
हाथों से रेत सा
बह जाता है कभी
अंजुलि से नीर सा
बांध ही नहीं पाते कभी
बहता पवन सा
लौट कर नहीं आता कभी
सुखद लम्हे सा
बीत कर नहीं देता कभी
बुरे सपने सा

दौड़ता है सरपट कभी
थमता ही नहीं
ठहर जाता है कभी
कटता ही नहीं
आगे बढ़ने ही देता नहीं
हार जाते होंसला
तूफान बन कर कभी
दे जाता गहरा सदमा

वक़्त की डोर हाथों में
कौन पकड़ पाया?
वक़्त का फेर ऐसा
कौन समझ पाया?

पूनम सिंह

 
आओ चलो

आओ फूलों की मुस्कान बनें
कब तक काटों से उलझेंगे।

चलो इंद्रधनुषी रंग बिखेंरे
कब तक धटाओं में छिपेंगे।

आओ नदी की रवानगी बनें
कब तक किनारों से टकरायें।

चलो आसमां की उड़ान लें
कब तक ज़मीं की धूल रहेंगे।

आओ समंदर की गहराई नापें
कब तक लहरों से खेलेंगे।

चलो पतंग की परवान बनें
कब तक मांझे से जुड़ेंगे।

आओ धडकनों में समायें
कब तक दिमाग में रहेंगे।

चलो आँखों का काजल बनें
कब तक रात की स्याही रहेंगे।

आओ सुबह की लाली बनें
कब तक ढलती शाम सजाएं।

चलो एक उम्र संवारे
कब तक लम्हों को चुराएं।

आओ एक कहानी लिखें
कब तक किस्सों में जिएंगे।।

पूनम सिंह
🌺🌷🌹🙏🙏🙏

 

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Ode To A Saree

O beautiful ! O desirable one !
Wrap me up and lend me your affection.

Silk, jute, georgette, linen,
Crepe, Chinon, chiffon or cotton…
On the skin, your magical touch
Induces feelings abundant.
Colour, tone, feel and texture
Impart you a distinct character.

Jewels, pearls, stones, bindis, bangles…
Forever remain your embellishments.
Innumerable patterns and designs,
Bestow you a rich heritage and shine.
Weaves, prints, embroidery, Kaari…
Artisans work upon you a story.
Canvas you offer is ever-widening,
For the artist to brush a dream.

O magnificent ! O splendorous one !
Full of grandeur ! A six-yard wonder !
Each one of you in the wardrobe,
Is in itself a narrative to be told.
At times, you propose,
To wipe the sweat off the brows,
Or wet hands of my li’l ones.

Softly fondled in your folds,
Many a time, you have enveloped,
Sleeping children in their mothers’ cuddle.
Often lovers have caressed the ones,
Whom you engulf with passion.
Feminity enjoys your protection,
Or veil the body’s imperfections.
And the chosen one who you drape,
Enhances her beauty and grace.

O beauteous ! O marvellous one !
Touch me and shower your love !
Indian women of all shapes and age,
Can’t get over your charm and rage.
May God keep growing their tribe,
Spreading your popularity far and wide.

Poonam Singh

अनजानी मंज़िल

एक शाम बैठा जब आंगन में तन्हा
हवा के झोंके ने छूकर पूछा
दर्द है क्या, ये बता
बहता नहीं क्यूं मुझसा ?

भंवरा भी गुनगुन करता गुज़रा
चुपके से बोला
प्यास है कैसी, ये बता
करता नहीं क्यूं पान मधु का?

डाली से एक पत्ता सूखा
गोद में आकर गिरा
टसक है कैसी, ये बता
किसी के नहीं क्यूं प्यार में गिरता?

बादलों ने दी दस्तक आसमान से
सोच रहा क्या बैठा?
चिंता है कैसी, ये बता
बनकर घटा नहीं क्यूं बरसता?

करूं क्या इनसे बयां हाल
सता रहा मुझे गम क्या?
तड़प है कैसी, बताऊं क्या
नहीं है कुछ पता।

कहां से आया, जाना कहां
कठिन डगर है, मंज़िल कहां?
चल पड़ा हूं किस ओर
नहीं है कुछ पता ।

तुझसे मिलने की चाह में
चुन लिया है जो रास्ता
सही है कितना, कितना गलत
नहीं है कुछ पता ।

पूनम सिंह

Today is lunar eclipse generating a lot of interest in kiddos…Moon has always evoked beauty, wonder, fascination, curiosity, magic,loneliness…amongst the mankind… cutting across generations and centuries. I have also been fascinated by it and as a child used to wonder about its waning and waxing  & would always be curious to know how to reach there…

once while taking a stroll in the garden on a full Moon night, got inspired enough to pen down the following lines…

अकेला चाँद

आसमान में कल पूनम का चाँद जो देखा

दूर खड़े लगा कितना तन्हा

सदियों- दर-सदियों चमक रहा तू अकेला

प्रेरणा दी है कितनों को, तुझे नहीं अंदेशा

कभी किसी चकोर की बना तू आस

कभी किसी प्रेयसी के मधुर कपोल

कभी नानी की लोरियों में बना तू मामा

कभी एक माँ का प्यारा सा नन्हा

कभी किसी शायर का हसीना सपना

कभी किसी कवि की कोई संवेदना

कभी हताश प्रेमी ने ढूँढा तुझमें साथी अपना

कभी किसी वैज्ञानिक की झकझोरी चेतना

आने वाली पीढ़ियाँ भी ढूँढेंगी तुझमें कुछ नया

पर चाहता है तू क्या, हमें नहीं चलेगा पता

सदियों- दर- सदियों चमकेगा यूँ ही तू अकेला

जब तक ख़त्म न होगा इस दुनिया का मेला।

 पूनम सिंह
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